20+ Special Mothers day Poems In Hindi

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Mothers are very special, she is someone who sacrifices everything for her kids, she deserves the best from her kids. Sometimes we are filled with the  immense love and passion for our mother but it is extremely difficult to express these deep heart emotions.

Mother’s day is a great occasion to express this love for the mothers. A beautiful gift, a bouquet or a card with the beautiful words can express the love for the mother, the love of mothers is a universal thing, it cannot be avoided.

This great feeling is made valuable through the emotional writings by poets all over the world, if you are a Hindi native there are some great poetic pieces in Hindi language that can help you express your endless love for your mother on her special day.

1. Something heart touching

घुटनों से रेंगते रेंगते
कब पैरों पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छाओं में
जाने कब बड़ा हुआ!

2. I love mom

मेरी प्यारी माँ तू कितनी प्यारी है
जग है अंधियारा तू उजियारी है
शहद से मीठी हैं तेरी बातें
आशीष तेरा जैसे हो बरसातें
डांट तेरी है मिर्ची से तीखी
तुझ बिन ज़िंदगी है कुछ फीकी
तेरी आंखो में छलकते प्यार के आंसू
अब मैं तुझसे मिलने को भी तरसूं
माँ होती है भोरी भारी
सबसे सुन्दर प्यारी प्यारी

3. For someone special

अपने आंचल की छाओं में,
छिपा लेती है हर दुःख से वोह
एक दुआ दे दे तो
काम सारे पूरे हों…

अदृश्य है भगवान,
ऐसा कहते है जो…
कहीं ना कहीं एक सत्य से,
अपरिचित होते है वोह…
खुद रोकर भी हमें
हसाती है वोह…
हर सलीका हमें
सिखलाती है वोह…

परेशानी हो चाहे जितनी भी,
हमारे लिए मुस्कुराती है वोह…
हमारी खुशियों की खातिर
दुखो को भी गले लगाती है वो…
हम निभाएं ना निभाएं
अपना हर फ़र्ज़ निभाती है वोह…
हमने देखा जो सपना
सच उसे बनती है वो…

4. The unmatched love

माँ से रिश्ता कुछ ऐसा बनाया
जिसको निगाहों में बिठाया जाए
रहे उसका मेरा रिश्ता कुछ ऐसा की
वो अगर उदास हो तो हमसे भी मुस्कुराया न जाये!

हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा भी साथ चलती है,
हम अब तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है
अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा,
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है!

दास्तान मेरे लाड़-प्यार की बस,
एक हस्ती के गिर्द घूमती है,
प्यार जन्नत से इसलिए है मुझे,
क्योंकि ये भी मेरी माँ के क़दम चूमती है!

5. Because you are special

शब्द हैं थोड़े उनके आगे ……
कैसे उन्हें पिरोऊँ मैं ?
“माँ ” की ममता सोच कर देखूँ  तो …..
बिन आँसूं के रोऊँ मैं ।

जिसने ये संसार बनाया ,
उनके स्नेह से मन हरषाया,
उनकी गोद में सर रखकर ….
बिन नींदों के सोऊँ मैं ।

शब्द हैं थोड़े उनके आगे ……
कैसे उन्हें पिरोऊँ मैं ?

“माँ” का प्यार है ऐसा निराला ,
दुश्मन का सर भी है झुक डाला ,
ऐसी “माँ ” का लाल बनकर ,
बिन हीरे के दमकूं मैं ।

शब्द हैं थोड़े उनके आगे ……
कैसे उन्हें पिरोऊँ मैं ?

जीवन पथ की कठिन डगरिया,
पार हुई पकड़ “माँ” की उंगलिया ,
डूब जाऊँ तो भी नहीं है गम अब ….
बिन पतवार की नईया खेमे में ।

शब्द हैं थोड़े उनके आगे ……
कैसे उन्हें पिरोऊँ मैं ?

“माँ” की भक्ति में हैं चारों धाम ,
तन-मन में बसा हो जब उनका नाम ,
प्राणओं को निकलते हुए न हो दर्द ,
बिन मौत के साँसों को रोकूँ मैं ।

शब्द हैं थोड़े उनके आगे ……
कैसे उन्हें पिरोऊँ मैं ?

6. The best gift, my mom

जन्म दात्री
ममता की पवित्र मूर्ति
रक्त कणो से अभिसिंचित कर
नव पुष्प खिलाती

स्नेह निर्झर झरता
माँ की मृदु लोरी से
हर पल अंक से चिपटाए
उर्जा भरती प्राणो में
विकसित होती पंखुडिया
ममता की छावो में

सब कुछ न्यौछावर
उस ममता की वेदी पर
जिसके
आँचल की साया में
हर सुख का सागर!

-बृजेशकुमार शुक्ला

7. Mom, you are great

संस्कार वह हमे बतलाती
अच्छा बुरा हमे बतलाती

हमारी गलतियों को सुधारती
प्यार वह हमपर बरसती.

तबियत अगर हो जाए खराब
रात-रात भर जागते रहना

माँ बिन जीवन है अधुरा
खाली-खाली सुना-सुना

खाना पहले हमे खिलाती
बादमे वह खुद खाती

हमारी ख़ुशी में खुश हो जाती
दुःख में हमारी आँसू बहाती

कितने खुश नसीब है हम
पास हमारे है माँ

होते बदनसीब वो कितने
जिनके पास ना होती माँ….

8. Because it is your day

जब हमें बोलना भी नही आता था,
तब भी हमारी हर एक बात समझ जाती थी माँ.
और आज जब हम बोलना सीख गये,
तो बात-बात पर बोलते हैं, “छोड़ो आप नहीं समझोगे माँ”!

रोज़ रौशन कर देती है मुक़दर मेरा
रात के अँधेरे में मेरी माँ की लोरियाँ ..
सबने बताया कि, आज मां का दिन है..
कौन बताएगा कि वो कौन सा दिन है, जो मां के बिन है!

मेरी प्यार की लिस्ट में
है सिर्फ तुम्हारा नाम
सिलेक्शन की भी लिस्ट में
है सिर्फ तुम्हारा नाम
तुम ही मेरी माँ और मेरी दोस्त हो
मेरा प्यार हमेशा तुम्हारे साथ हो.
|| मदर डे की शुभकामनाएँ ||

9. Mothers are heaven

“माँ” का एक प्यार ही मुझको इतना बार बनाकर लाया ,
वरना इस जीवन को मैंने सपनों में भी कभी न पाया ।

कैसे कह दूँ  की “माँ” की ममता होती है अफसानों में,
इसके किस्से बन न सके अबतक ये बंद होती है तहखानों में ।

सारा जोबन गाल के उसने तन-मन से औलाद को सींचा,
उसी औलाद के धुत्कारे जाने पर अपने होटों को सदा ही भींचा ।

“माँ” ही जननी ,”माँ” ही देवी,”माँ” की ममता अपरमपार ,
जिस रूप में चाहोगे उसको उसी रूप में मिलेगा प्यार ।

तिरस्कृत हो समाज से वो फिर भी वात्सल्य की आस न छोड़े ,
चाहें बदल जाएँ बच्चे वो फिर भी उनसे मुँह न मोड़े ।

टुकड़ों में बाँट दिया “माँ” को एक “माँ” के पांच बेटों ने,
पर बाँट न सकी वो मरते दम तक उनमे से एक को भी दो टुकड़ों में ।

ऐसी “माँ” को नमन न हो तो अपने जीवन पर है धुत्कार ,
क्योंकि इस जग में लाने की खातिर हमको उसने पार की हैं न जाने कितनी दीवार ?

10. You are a blessing mom

मेरे सर्वस्व की पहचान
अपने आँचल की दे छाँव
ममता की वो लोरी गाती
मेरे सपनों को सहलाती
गाती रहती, मुस्कराती जो
वो है मेरी माँ।

प्यार समेटे सीने में जो
सागर सारा अश्कों में जो
हर आहट पर मुड़ आती जो
वो है मेरी माँ।

दुख मेरे को समेट जाती
सुख की खुशबू बिखेर जाती
ममता की रस बरसाती जो
वो है मेरी माँ।

-देवी नांगरानी

11. You are my whole universe

माँ की ममता करुणा न्यारी,
जैसे दया की चादर
शक्ति देती नित हम सबको,
बन अमृत की गागर

साया बन कर साथ निभाती,
चोट न लगने देती
पीड़ा अपने उपर ले लेती,
सदा सदा सुख देती

माँ का आँचल सब खुशियों की,
रंगा रंग फुलवारी
इसके चरणों में जन्नत है,
आनन्द की किलकारी

अदभुत माँ का रूप सलोना,
बिलकुल रब के जैसा
प्रेम के सागर सा लहराता,
इसका अपनापन ऐसा….

12. You make me happy

बचपन में सोचा करती थी मैं ,
बैठ कदम्ब  के पेड़ के नीचे,
कि “माँ” ही वो दौलत है मेरी ,
जो इतने स्नेह से मुझको सींचे ।

विद्यालय से झूठ बोलकर आ …..
जब मै कमरे में छुप जाती थी,
तब “माँ” ही मुझको समझाकर ,
प्यार से गले लगाती थी ।

ब्याह हुआ तो पराये घर जाने की ,,,,
“माँ” से ही एक नयी सीख मिली,
झगड़ा वहां पर कभी न हो मेरा ,
ऐसी उत्तम एक तरकीब मिली ।

बच्चों के लालन-पालन का …..
“माँ” ने दिया मुझे ऐसा ज्ञान ,
ताकि हर कदम पर मुझको मिले ,
नए घर में पूरा सम्मान ।

धीरे-धीरे ….चुपके-चुपके वो ….
दूर से बैठी रंग भरती रही,
और उसके जीवन काल की हस्ती,
बिन कुछ कहे ही घटती रही ।

और एक दिन वो काला दिन भी आया ,
जब “माँ” का चेहरा सदा के लिए मुरझाया,
उसके जाने के एहसास ने मुझको,
अब उसका स्नेह याद दिलाया ।

आज फिर उसी कदम्ब के पेड़ के नीचे …….
मैं सोच रही बैठी यूँ अकेले में,
कि क्यूँ  मैं “माँ” तुम्हे पहचान न पायी,
इस दुनियादारी के झमेले में।

13. Happy mother’s day

माँ आँखों से ओझल होती,
आँखें ढूँढ़ा करती रोती।
वो आँखों में स्‍वप्‍न सँजोती,
हर दम नींद में जगती सोती।

वो मेरी आँखों की ज्‍योति‍,
मैं उसकी आँखों का मोती।
कि‍तने आँचल रोज भि‍गोती,
वो फि‍र भी ना धीरज खोती।

कहता घर मैं हूँ इकलौती,
दादी की मैं पहली पोती।
माँ की गोदी स्‍वर्ग मनौती,
क्‍या होता जो माँ ना होती।

नहीं जरा भी हुई कटौती,
गंगा बन कर भरी कठौती।
बड़ी हुई मैं हँसती रोती,
आँख दि‍खाती जो हद खोती।

शब्‍द नहीं माँ कैसी होती,
माँ तो बस माँ जैसी होती।
आज हूँ जो, वो कभी न होती,
मेरे संग जो माँ ना होती।।

-गोपाल कृष्‍ण भट्ट ‘आकुल’

14. Mother the rose in the desert

रब ने माँ को यह आज़मत कमाल दी,
उसकी दुआ पर हर मुसीबत भी टाल दी…
माँ के प्यार की कुछ इस तरह मिसाल दी,
कि जन्नत उठाकर माँ के क़दमों में डाल दी!

15. Thank you God for my mother

आँचल में दूध लिए ………
आँखों से छलकता पानी,
सोच रही “माँ” बैठ सड़क पर ,
किसे कहूँ अपनी दुखभरी कहानी ?

बीती रात को बेटे ने उसके ……..
घर से बाहर निकाला ,
कि  सह न सकेगा खर्च वो उसका,
अपनी कमाई का देके हवाला ।

न घर है अब कोई मेरा,सोच रही वो कहाँ जाऊँ ?
किसके घर जाकर अब , मैं अपना डेरा जमाऊँ ?
बचपन होता तो झूठ बोलकर,लोगों से मैं नज़र बचाऊँ ,
परन्तु इस उम्र में, सच बोलने का साहस कहाँ से लाऊँ ?

भूखे पेट वो चलती रही ……
किसी “वृधाश्रम” की तलाश में,
क्योंकि शहरों में ऐसा अक्सर होता है,
पड़ा था उसने किसी किताब में।

पहुँच कर आश्रम उसने वहाँ का द्वार जब खटखटाया,
तो हाथ में “फॉर्म” पकड़े एक कर्मचारी बाहर आया ,
बोला माताजी ये “फॉर्म” नहीं सिर्फ एक औपचारिकता है,
घर से बुजुर्गों को निकालना आम सी बन गयी, ये “हिन्दुस्तानी सभ्यता” है ।

16. My mom, my protector

शख्सियत, ए ‘लख्ते-जिगर’, कहला न सका ।
जन्नत.. के धनी पैर.. कभी सहला न सका ।

दुध, पिलाया उसने छाती से निचोड़कर,
मैं ‘निकम्मा’, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका ।

बुढापे का सहारा.. हूँ ‘अहसास’ दिला न सका
पेट पर सुलाने वाली को ‘मखमल, पर सुला न सका ।

वो ‘भूखी’, सो गई ‘बहू’, के ‘डर’, से एकबार मांगकर,
मैं सुकुन.. के ‘दो, निवाले उसे खिला न सका ।

नजरें उन बुढी, आंखों.. से कभी मिला न सका ।
वो दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका ।

जो हर रोज ममता, के रंग पहनाती रही मुझे,
उसे दीवाली पर दो जोड़, कपडे सिला न सका ।

बिमार बिस्तर से उसे शिफा, दिला न सका ।
खर्च के डर से उसे बडे़ अस्पताल, ले जा न सका ।

माँ के बेटा कहकर दम, तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ,
दवाई, इतनी भी महंगी.. न थी के मैं ला ना सका ।

17. My mom, my inspiration

प्यारी प्यारी मेरी माँ
प्यारी-प्यारी मेरी माँ
सारे जाग से न्यारी माँ.

लोरी रोज सुनाती है,
थपकी दे सुलाती है.
जब उतरे आँगन में धूप,
प्यार से मुझे जगाती है.

देती चीज़ें सारी माँ,
प्यारी प्यारी मेरी माँ.

उंगली पकड़ चलाती है,
सुबह-शाम घुमाती है.
ममता भरे हुए हाथों से,
खाना रोज खिलाती है.

देवी जैसी मेरी माँ,
सारे जाग से न्यारी माँ….

18. You are my sunshine

प्यार करना कोई तुमसे सीखे


प्यार कराना कोई तुमसे सीखे


तुम ममता की मूरत ही नहीं,


सब के दिल का एक टुकड़ा हो


मैं कहती, कहता हूँ माँ,


तुम हमेशा ऐसी ही रहना…


|| मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएँ ||

19. You are my savior mom

सुनकर “माँ ” बोली उससे ,ये मेरे आँसू नहीं पानी हैं ……..
बेटा  बहुत लायक है मेरा, ये ही सच्ची कहानी है ।
उसने मुझे नहीं निकाला ,मैं खुद से चली आयी हूँ ,
अपने जीवन- काल को ,समर्पित करने यहाँ आयी हूँ ।

वो “नादान परिंदा” मेरा, उड़ना अभी न जान सका….
अपने नीड़ की टहनी को, मेरे संग न बाँध सका ।
“भरत” ने भी क्या दुःख भोग होगा ,अपने “राम” के जाने से ,
मेरा बेटा  छोड़ गया सब , मेरे यहाँ पर आने से ।

मोह नहीं उसे इस दौलत का ,मेरे लिए तड़पता है ……
मगर मेरा ह्रदय कठोर बड़ा ,जो हर पल उसे तिरस्कृत करता है ।
याद रखो मेरी अपने मन में ,ये छोटी सी एक बात ,
कि  “हिन्दुस्तानी सभ्यता ” नहीं बदली ,बस बदल गए हैं हमारी सोच के सवालात ।

20. Every day is your day mom

निर्भिक होकर उड़ चल अपनी डगर को
अम्बर सा आँचल लिये, तुम्हारी “माँ” है

रँज-ओ-ग़म के बादल भी काफ़ूर हो जायेंगे
आशियाने में पास तुम्हारे, तुम्हारी “माँ” है

किसकी तलाश में भटक रहा है मदार-मदार
काशी क्या, हरम क्या, बस तुम्हारी “माँ” है

ममता की गहराई से हार गया समन्दर भी
देख तेरी मुस्कान, जी रही तुम्हारी “माँ” है

तेरे कदमों की आहट से बढ़ जायेगी धड़कनें,
जाने कब से इंताजर में बैठी तुम्हारी “माँ” है

कवियों की करतूतों से, भ्रमित न हो तू
मु-अत्तर गुल्सिताँ सिर्फ़ तुम्हारी “माँ” है

उपमाओं से ना बदल शख़्सियत ऐ ‘कवि’
उसे “माँ” ही रहने दे, वो तुम्हारी “माँ” है

21. You are my smile

माँ सब जानती है,
तुझे खुद से भी ज्यादा पहचानती है,
लाख कोशिश कर तू छिपाने की,
तेरे हर सुख-दुख को वो जानती है |             

खुद जागकर तुझे सुलाती है,
खुद रोकर तुझे हंसाती है,
तन्हा रहती है खुद मगर,
तेरा साथ हमेशा निभाती है,
माँ सब जानती है |                                       

जब तुझे चोट लगे तो सिसकती है माँ,
जब तू गलती करे तो समझती है माँ,
तू ही तो है माँ का लाडला,
जब तेरी आँखे भीगे आंसुओं से,
तो अपना आँचल देती है माँ,
माँ सब जानती है |                                     

उसकी हर दुआ कबूल है,
वो तो ममता का एक फूल है,
शायद तभी भगवान से भी ऊपर आती है माँ,
एक सच्चा दोस्त कहलाती है माँ,
तुझे ना हो फुर्सत एक पल भी उसके लिए,
उसका हर पल हर लम्हा है तेरे लिए,
माँ सब जानती है |                                     

पर आज मैं दूर हूँ,
खुद से मजबूर हूँ,
उलझा हूँ ज़िन्दगी के सफर में,
चल रहा हूँ माँ तेरे सपनो की डगर पे,
चाहत है तुझे खुश रखने की,
मुझे पता है माँ तू सब जानती है |

Above are some glimpses of how people feel about their mothers. Share them with your mother on this mother’s day and see her face glow with the feeling that she means a whole world for you, even if she is away from you it will make her sense your presence.

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